आपका साथ अगर नहीं होता
खुबसूरत सफर नहीं होता
सिर्फ़ हैवानियत ही रह जाती
जज्ब -ए-इश्क़ अगर नहीं होता
पूजता चाँद को भला कोई
खुबसूरत अगर नहीं होता
आसमान है ज़मीन है लेकिन
हर फ़कीरों का घर नहीं होता।
आपका साथ अगर नहीं होता
खुबसूरत सफर नहीं होता
सिर्फ़ हैवानियत ही रह जाती
जज्ब -ए-इश्क़ अगर नहीं होता
पूजता चाँद को भला कोई
खुबसूरत अगर नहीं होता
आसमान है ज़मीन है लेकिन
हर फ़कीरों का घर नहीं होता।
शोदा महारानी को शीरा-पूडी और रसीले पदार्थो से भोग लगाया जाता है। कन्हैया के जन्म की खुशी में घर-आंगन और गली-मोहल्लों को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। घर-घर में तरह-तरह के व्यंजन और पकवान बनते हैं। [ठाकुर जी का श्रृंगार] इस दिन सुबह से ही अधिकांश घरों में व्रत रखा जाता है। कुछ लोग जल भी ग्रहण नहीं करते। घर-घर में धनिया की पंजीरीऔर पंचामृत बनाया जाता है। पूरे दिन भजन-कीर्तन के कार्यक्रम चलते रहते हैं। रात्रि को जैसे ही 12बजते हैं, ब्रज के अधिकांश मंदिरों और घरों से शंख, घंटा, घडियाल आदि की आवाज गूंज उठती है। सभी अपने-अपने ठाकुर विग्रहों[कृष्ण-मूर्ति] का पंचामृत से अभिषेक करते हैं।